भाजपा सत्ता में नही पर विरोध में है

 लोग कहते हैं कि भाजपा सत्ता में है,  पर मैं कहता हूं कि  भाजपा सत्ता में नहीं भाजपा विरोध में  है

वैसे तो भाजपा 2014 का केंद्र में सत्ता में आई है पर जब से सत्ता में आई है तब से विरोध में ही बैठी है, वह कैसे आप जानिए.

(1) बेरोजगारों के विरोध में

आए दिन पढ़े-लिखे बेरोजगारों को सरकार के सामने नौकरी के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है, परंतु सरकार ना तो उनकी सुन रही है और ना ही उन को रोजगार दे पा रही है. बल्कि उन लोगों का मजाक उड़ाया जा रहा है जो रोजगार मांगने जा रहे हैं. रोजगार के नाम पर पकोड़ा योजना, पान मामा की दुकाने डालने का सजेशन दिया जाता है. तो हुई ना बेरोजगार विरोधी भाजपा.

(2) व्यापार विरोधी भाजपा

भारतीय जनता पार्टी की केंद्र की सरकार ने जब से जीएसटी का कानून लागू किया तब से छोटे हो या बड़े सभी व्यापारियों का व्यापार ठप हो चुका है क्योंकि विश्व में सबसे ज्यादा जीएसटी भारत में है. जीएसटी के नियम भी बार-बार बदले जाते हैं जिनकी वजह से व्यापारियों की परेशानी यह हो गई है कि अब अगर पीएसटी फाइल ना करें तो जुर्माना भरना पड़ता है और व्यापार में भी कमी आ चुकी है, तो आप तो कहना ही पड़ेगा व्यापार विरोधी भाजपा सरकार...

(3) स्टूडेंट विरोधी भाजपा सरकार

2014 से लेकर अब तक हर जगह स्टूडेंट अपनी आवाज बुलंद करते रहे हैं. क्योंकि भाजपा सरकार ना तो सही तरह से एग्जाम ले पा रही है, और ना ही पढ़े-लिखे स्टूडेंट को सरकारी नौकरियों में भर्ती दे रही है. और इस बार तो कोरोना की वजह से कई एक्जाम्स भी रद्द कर दिए गए है. जब एक्जाम्स नहीं लोगे तो, सरकारी भर्ती कैसे करोगे ? जितने भी एक्जाम लिए उसने कई एक्जाम्स में तो पेपर भी लीक हो गए थे.

(4) किसान विरोधी भाजपा सरकार

भारत के किसान जिनको हम अन्नदाता भी कहते हैं, वह भी सरकार से परेशान होकर कई महीनों से दिल्ली बॉर्डर पर डेरा जमाए बैठे हुए हैं. केंद्र सरकार द्वारा थोपे गए काले कानून को रद्द करवाने के लिए किसान आज सड़कों पर उतर गए हैं. फिर भी तानाशाह सरकार किसानों की मांग को मानने के मूड में नहीं है.

(5) महिला विरोधी भाजपा सरकार

आप जानते ही होंगे आए दिन कहीं ना कहीं पर महिलाओं के शोषण और महिलाओं पर अत्याचार की बातें आती रहती है, उनको लेकर ही कानून तो बने हैं पर कानून का पालन योग्य तरह से नहीं हो रहा. बल्कि जब भी कोई शासक के पहचान वाला आ जाता है इस कांड में, तब उनको बचाने के लिए पूरी शासक मंडली रास्ते पर उतर के उनका समर्थन करती है.

(6) कर्मचारी विरोधी भाजपा सरकार 

आज के दौर में एक तरफ पढ़े-लिखे युवा बेरोजगार घूम रहे हैं उसी सरकार में आउट सोर्स से कर्मचारियों की भर्ती होती है, पर सरकार अपनी तरफ से डायरेक्ट भर्ती नहीं करती, क्यो ???

क्योंकि अगर डायरेक्ट भर्ती किया तो कर्मचारी को तनख्वाह ज्यादा देनी पड़ेगी और आउटसोर्सिंग से लिए गए कर्मचारी की सारी जिम्मेदारी भी कंपनी वालोकी होगी, सरकार की नही. और एक बात जब भी कर्मचारियों को वेतन, भट्ठा बढ़ाने का समय आता है तो बिना आंदोलन किए काम नही होता.

(7) विरोध करने वालो की विरोधी भाजपा सरकार

किसी भी मुद्दे पर अगर कोई सरकार का मन करता है तो उन पर कैसे भी करके दबाव बढ़ाया जाता है कि वह सरकार का विरोध ना करें, और अगर विरोध करें तो उन पर गलत तरीके से एफआईआर दाखिल करवा देते हैं ताकि दूसरा कोई विरोध करने वाला आगे ना आए. उदाहरण तो बहुत है पर एक बात आपको बता दूं कि हाल ही में स्वतंत्र पत्रकार विनोद दुआ पर केस करवा कर उनका मुंह बंद करना चाहा था, पर भला हो उस जज का जिन्होंने विनोद दुआ के पक्ष में फैसला लिया और आदेश किया की सरकार की गलत नीतियों का विरोध करना देशद्रोह नही, और पत्रकार पर ये लागू नही होता.

और भी कई बातो पर चर्चा हो सकती है पर आप ऊपर की गई बातो से समझ गए होंगे की सरकार सत्ता में नही पर विरोध में है.

क्यो सही कहा ना ????

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