पत्रकारों के सवालों से BJP में भागमभाग..!
जामनगर में भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर विवाद: समय से पहले निपटाने का आरोप, पत्रकारों ने उठाए सवाल
जामनगर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और लोक सेवा में 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी द्वारा देश भर में विभिन्न कार्यक्रमों की योजना बनाई जा रही है। इसी क्रम में गुजरात के जामनगर में भाजपा की ओर से एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी, लेकिन यह आयोजन अब चर्चा का केंद्र बन गया है।
जामनगर में इस पत्रकार परिषद का समय दोपहर 1:45 बजे तय किया गया था। आरोप है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस को निर्धारित समय से पहले ही और गिने-चुने पत्रकारों की मौजूदगी में आनन-फानन में समेट दिया गया। कई स्थानीय पत्रकारों के पहुंचने से पहले ही कार्यक्रम समाप्त हो जाने पर मीडिया जगत और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
जब पत्रकारों के सवाल से डर था, या पत्रकारों का इंतजार नहीं करना था तो फिर, गिने चुने पसंदीदा पत्रकारों को बुलाकर ही ब्रीफ कर देते.. पत्रकारों ने तो कहा नहीं था, की आप प्रेस कॉन्फ्रेंस करिए.
स्थानीय पत्रकारों का कड़ा रुख
इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठ रहे हैं कि जब जामनगर में सांसद भाजपा के हैं, विधायक भाजपा के हैं और महानगर पालिका में भी भाजपा का ही शासन है, तो ऐसे में विकास कार्यों और जनहित से जुड़े सवाल सत्ताधारी दल से ही पूछे जाएंगे। पत्रकारों का कहना है कि:
* प्रेस कॉन्फ्रेंस के समय और आयोजन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
* तीखे और जवाबदेही तय करने वाले सवालों से बचने के लिए इसे समय से पहले समेटने का आरोप लगाया जा रहा है।
राष्ट्रीय संदर्भ से जोड़कर हो रही आलोचना
जामनगर के इस वाकये को विपक्ष ने राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के मीडिया संवाद के तौर-तरीकों से जोड़ दिया है। आलोचकों का तर्क है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लंबे कार्यकाल के दौरान पारंपरिक खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से परहेज किया है। इसके अलावा, हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य वरिष्ठ नेताओं की प्रेस वार्ताओं में पत्रकारों के कठिन सवालों को नजरअंदाज करने या बिना जवाब दिए जाने के उदाहरण देकर यह आरोप लगाया जा रहा है कि पार्टी असहज करने वाले प्रश्नों से दूरी बना रही है।
भाजपा का संभावित पक्ष
दूसरी तरफ, पार्टी से जुड़े सूत्रों और समर्थकों का अक्सर ऐसे मामलों पर यह तर्क रहता है कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल विशिष्ट अभियान की रूपरेखा साझा करना था और समय की कमी या पूर्व-निर्धारित व्यस्तताओं के चलते प्रेस वार्ता को संक्षिप्त रखा गया। भाजपा का कहना है कि सरकार सोशल मीडिया, सीधी रैलियों और सार्वजनिक संबोधनों के जरिए जनता से सीधा संवाद स्थापित करने पर अधिक भरोसा करती है।
फिलहाल, जामनगर में हुई इस संक्षिप्त प्रेस कॉन्फ्रेंस ने यह बहस फिर छेड़ दी है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता पक्ष को जवाबदेही और मीडिया के तीखे सवालों का सामना कितनी तत्परता से करना चाहिए।
कल्पेश रावल
पत्रकार एवं संपादक


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