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"सब्जी मंडी और राजनीति"

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 "सब्जी मंडी और राजनीति" सब्जी मंडी और राजनीति पढ़ने में कुछ अजीब सा लग रहा होगा पर आजकी राजनीति में यही चल रहा है. इसको दो अलग अलग तरीकों से समझना जरूरी है. (1) सब्जी मंडी सब्जी मंडी में जब तरोताजा सब्जी आती है तब (बीचवाले) दलाल सब्जी के दाम तय करते है. फिर उसी दाम से ज्यादा जो व्यापारी पैसा दे पाएगा वही व्यापारी उस सब्जी को खरीद पाएगा. सब्जी को खरीदने के बाद छोटे छोटे व्यापारी अपनी कमाई उस दाम पर बढ़ाकर सब्जी बेचते है, सुबह सुबह आप अगर सब्जी खरीदने जाओगे तो आप जैसे ही उनसे दाम कम करने को कहेंगे वैसे ही वो मना कर देगा की अगर आपको इसी दाम से सब्जी खरीदनी हो तो खरीदे नही तो आगे चले जाइए. क्योंकि उनको पता है तरोताजा सब्जी ऊपर से शादियों का मौसम है तो शाम तक तो उचित दाम के सब्जी पूरी की पूरी बिक ही जाने वाली है, फिर वो अपनी कमाई क्यो छोड़ दे. खेल अब शुरू होता है. जैसे जैसे दिन ढलने लगता है वैसे वैसे व्यापारी हर घंटे सब्जी को तरोताजा रखने की कोशिश करता रहता है. जैसे ही शाम हो जाती है, आप उसी व्यापारी के पास जाओ और उसी सब्जी के दाम को आप घटाने के लिए कहो जिस सब्जी के दाम आपने सुबह...

नवरात्रि के महत्व को समझे और नई पीढ़ी को भी समझाए.

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  *1.) प्रथम शैलपुत्री यानि हरड़ -*  नवदुर्गा का प्रथम रूप शैलपुत्री माना गया है। कई प्रकार की समस्याओं में काम आने वाली औषधि हरड़, हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप हैं। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है, जो सात प्रकार की होती है।  *हरीतिका (हरी)-* भय को हरने वाली है। *पथया -* जो हित करने वाली है।   *कायस्थ -* जो शरीर को बनाए रखने वाली है। *अमृता -* अमृत के समान। *हेमवती -* हिमालय पर होने वाली। *चेतकी -* चित्त को प्रसन्न करने वाली है। *श्रेयसी (यशदाता) शिवा -* कल्याण करने वाली। *2.) द्वितीय ब्रह्मचारिणी यानि ब्राह्मी -*  ब्राह्मी, नवदुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है। यह आयु और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाली, रूधिर विकारों का नाश करने वाली और स्वर को मधुर करने वाली है। इसलिए ब्राह्मी को सरस्वती भी कहा जाता है। यह मन व मस्तिष्क में शक्ति प्रदान करती है और गैस व मूत्र संबंधी रोगों की प्रमुख दवा है। यह मूत्र द्वारा रक्त विकारों को बाहर निकालने में समर्थ औषधि है। अत: इन रोगों से पीडित व्यक्ति को ब्रह्मचारिणी की आराधना करनी चाहिए। *3.) तृतीय चंद्रघंटा यानि चन्...

हम गांधीजी की आलोचना कर सकते है, स्थानीय गैंगस्टर की नही...!

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 हम गांधी जी की घोर आलोचना कर सकते हैं  स्थानीय गैंगस्टर नहीं!  मैंने ऐसे कई पोस्ट देखे हैं जिनमें गांधीजी की देशद्रोही/ब्रिटिश एजेंट/दलितों/पाखंडी आदि के दुश्मन के रूप में आलोचना की गई है!  सभी को किसी भी विचार के खिलाफ अपनी राय व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए  लेकिन विवेक के साथ  स्वस्थ समाज के लिए यह भी जरूरी  गांधीजी को एक और विचार के समर्थन के लिए एक शब्द देना फैशन बन गया है  कई लोगों ने गांधी जी की आलोचना कर अपना करियर भी बनाया है  प्रारंभ में, ओशो ने गांधीजी की कठोर आलोचना करके लोकप्रियता हासिल की  लेकिन ओशो अगर आज जीवित होते तो नकली राष्ट्रवादियों की आलोचना नहीं कर पाते थे  उन्होंने गांधीजी की कितनी भावुकता से आलोचना की!  ओशो अगर स्वघोषित  देशभक्तों की आलोचना करते हैं तो  ट्रोल्स गैंग दे रही है मा-बेन एक डर्टी स्पैंकिंग  उसी तरह स्वामी अग्निवेश पर हमला करके  उन्हें चुप कराओ!  आज का युवा कभी भी पुस्तकालय नहीं जाता और इतिहास का एक पन्ना पढ़ने की कोशिश नहीं करता  *आईटी सेल* उनके मोबाइ...

गुजरात में भाजपा के चाणक्य का दाव उल्टा पड़ गया...!?

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गुजरात में भाजपा की सरकार ने मुख्यमंत्री विजय रुपाणी का इस्तीफा लेकर सारे के सारे मंत्रियो को घर का रास्ता दिखा दिया. अब नए मुख्यमंत्री के रूप में भूपेंद्र पटेल को बिठाकर नए मंत्रियों की टीम बनाकर जनता के सामने पेश की गई है. पुराने जो मंत्री थे उसमे से एक भी मंत्री को नए मंत्रिमंडल में शामिल नही किया गया. इस बात पर कुछ गोदी मीडिया के द्वारा ये साबित करने का प्रयास किया जा रहा है की जो व्यक्ति भाजपा में रहते मोदीजी के हिसाब से काम नही कर पाता उनको घर पर बिठा दिया जाता है. चाहे वो मंत्री हो या मुख्यमंत्री. गुजरात भाजपा की प्रयोग शाला है, यहां जो सक्सेस गया वो मॉडल पूरे देश में लागू किया जा सकता है ऐसा भाजपाई और मोदी जी का कहना है.  पर इस बार बार कुछ और ही है..! इसको समझने के लिए पहले से शुरू करना पड़ेगा..! जिस दिन विजय रुपाणी का इस्तीफा आया उसके अगले दिन अमित शाह गुजरात आए थे और सब कुछ ( उसके हिसाब से) सेट कर गए थे. जैन के त्योहार संवत्सरी के दूसरे दिन विजय रुपाणी को इस्तीफा देना है. कोई भी सूचना के बिना, किसी को भी भनक ना लगी, यहां तक की पत्रकारों के सोर्स भी काम नही आए, और अचानक वि...

कोई लौटा दे मुझे पहले वाले दिन

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 मैं यह सब ढूंढ रहा हूं लेकिन यह नहीं मिल रहा है।  घर पर मुफ्त टीका।  घर बैठे मुफ्त दवाएं।  मेरे कर खाते ..  बलात्कारियों को फांसी..  घोटालेबाज को जेल..  ऑक्सीजन अस्पताल की सुविधा  सरकारी हाईटेक स्कूल जो महीने में 25 से 50 पढ़ाते थे और अनुभवी शिक्षक थे...  350 गैस सिलेंडर।  55 रु.  गश्ती..  45 रु.  डीजल ..  राष्ट्रीय राजमार्ग कांग्रेस द्वारा निर्मित राज्य राजमार्ग हैं।  अघोषित रोजगार..  बाजार में उछाल..  व्यापार में उछाल  7000 पर चल रहा सिर्फ एक मिडिल क्लास हाउस जो आज 25000 है...  20 रुपए गेहूं का आटा..  चने का आटा 50 रु.  40 किलो सब्जियां।  पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम।  सरकारी नौकरियों ..  महिलाओं की सुरक्षा..  मेरे टैक्स का पैसा, अच्छी सस्ती शिक्षा, अच्छी सड़कें, अच्छी जल निकासी लाइनें।  मैं सरकारी काम में आसानी की तलाश में हूं।  डरा हुआ देश..  चीन का 35 किमी तक पीछे हटना..  एक सरकारी संस्थान बनाने के लिए।  बैंक ऋण की आवश्यकता नहीं है। ...

सिद्धि विनायक धाम सपड़ा का इतिहास

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  सिद्धिविनायक धाम जामनगर से 15 किमी दूर कलावड़ रोड पर सपड़ा गांव में एक पहाड़ी पर स्थित है।इस गजराज की आस्था हलार तक ही सीमित नहीं है।  गणपति देव रूपारेल सदियों पहले नदी के तट पर और सुंदर पहाड़ी में, भक्तों की आस्था और मानसिक श्रम का फल, शीश लहराते हुए प्रकट हुए थे।  आइए आज गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर बापा की अनुपम कृपा और इतिहास के बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं। हिंदू धर्म में 3 करोड़ देवी-देवताओं की पूजा की जाती है।  जिसमें महादेव शिव को शंकर लोक कल्याणकारी और भोलानाथ के रूप में पूजा जाता है।  इस भोलेनाथ ने स्वयं कहा है कि मेरे पूजन से पूर्व जगत में मेरे पुत्र गणेश की पूजा की जाएगी।  यहां तक ​​कि स्तुति गाने वाले और विशेष दर्जा देने वाले भगवान शिव को भी डंडाला देव गणपति की प्रथम भक्ति शक्ति की महिमा है।  सच्चे विश्वास के साथ, जो भक्त किसी भी दुख या दर्द-संकट के साथ सिद्धिविनायक से गुजरता है, वह एक निश्चित हल्के फूल के साथ लौटता है।  विधानहर्ता गणपति महाराज भक्तों और भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं।  मानसून के दौरान चारों ओर फैली हर...

मंत्रीजी जनता का दर्द समझ गए, पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को समझ नही आ रहा...!

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 विभीषण हर घर में होता ही है. सरकार में रहकर सरकार के सामने आवाज उठाना भी बड़ी बात है. में बात कर रहा हु गुजरात के आरोग्य मंत्री कुमार कानानी की, कुमार कानानी ने हाल ही में प्रशाशन के सामने अपनी आवाज उठाई है. कुमार कानानी ने गुजरात के ट्रैफिक डीजीपी को पत्र लिखा है. उस पत्र में कुमार कानानी ने विनंती के साथ चेतांवनी भी दी है. कुमार कानानी ने ट्रैफिक डीजीपीको लिखे पत्र में लिखा है. महामारी में सिर्फ मास्क ना पहने हो उस बात पर ही दंड वसूल किया जाए, इसके अलावा कोई भी दंड वसूल नही किया जाना चाहिए. क्योंकि कोरोना महामारी में कई लोगो के पास खाने के पैसे भी नहीं है, और आप दंड वसूल करेंगे तो क्या होगा ? इसलिए मास्क ना पहनने पर दंड वसूलने के अलावा कोई भी दंड न वसूला जाए. कुमार कानानी का कहना है अगर ऐसा नही किया गया तो में आंदोलन करूंगा. एक टीवी चैनल के इंटरव्यू में कुमार कानाणि ने कहा की मैने डीजीपी को पत्र लिखकर बिनती भी की है, अगर माने तो ठीक है नही तो आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है. ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि बहुत से लोगो ने मुझसे फरियाद भी की थी और सुझाव भी दिए थे. वैसे तो भाजपा की सर...