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महात्मा गांधी को कितनी बार मारोगे ??? अब और नही...

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गांधी को फिर मरने नही देंगे। गांधी भगवान नहीं, अवतार नही, नबी नही, जीसस भी नही है। वो एक मामूली इंसान थे। कुछ सोचता थे, बोलता थे.. लोग सुनते थे, मान जाते थे, या नही भी मानते थे। फिर भी हम गांधी को पूजते हैं।  मन्दिर में नही, हृदय में.. माना कि गांधी ईश्वर नही, माना वह आलोचना से परे नहीं। क्यो हो, हम तो यहाँ ईश्वर की भी आलोचना करते है। श्रीराम द्वारा बाली को छुपकर मारने पर, स्त्री के त्याग पर। टिप्पणी कृष्ण पर भी करते हैं, सम्विधान पर भी।  आलोचना से परे तो कोई नही। गांधी भी नही।  पर तय तो हो के आलोचना किस बात की करेंगे? क्या सत्य बोलने के आग्रह पर, क्या अहिंसा के प्रण पर?क्या हम भरोसे, मुस्कान, प्रेम और एकता के विचार के लिए गांधी का विरोध करेंगे,या भाईचारे के आग्रह पर? हो कहाँ पाता है आपसे। आप जब झूठ फैलाते है, तो खुद ही उसे "असली सच" का नाम देते हैं जब गांधी की शिक्षाओं से, उनके असर और व्यक्तित्व से न लड़ सके, तो आपने गांधी को ही खत्म कर दिया।  इस उम्मीद में कि विचारों का ये झरना मिट जाए। वो गोडसे जो कर गया, कुछ अधूरा रह गया। लेकिन गांधी नही मिटा, वो बड़ा...

सोशल मिडिया उपयोग करने का तरीका क्या है ?

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सोशल मीडिया से आशय पारस्परिक संबंध के लिए अंतर्जाल या अन्य माध्यमों द्वारा निर्मित आभासी समूहों से है। यह व्यक्तियों और समुदायों के साझा, सहभागी बनाने का माध्यम है। शोसल मीडिया क्या है ? ये किसी को समझाने की जरूरत नही लग रही. क्योंकि आज विश्व के बड़े बड़े देश, भारत के बड़े शहर से लेकर छोटे छोटे गांव तक हर किसी के हाथ में मोबाइल फोन उपलब्ध है. शायद ही कोई व्यक्ति ऐसा होगा की वो अपने मोबाइल में सोशल एप्स का उपयोग न करता हो. उसमे भी ज्यादातर बुजुर्ग लोग ही होंगे. इसलिए आज मैंने सोचा की क्यूँ न आप लोगों को Social Media क्या होता है और ये किस तरह से हमारे जीवन का एक मुख्य हिस्सा बन गया है इसी के बारे में जानेंगे. बस इसी चीज़ के विषय में पूर्ण जानकरी देने के लिए आज मैंने ये Topic का चुनाव किया है, तो फिर देरी किस बात की चलिए शुरू करते हैं. लोकप्रियता के प्रसार में सोशल मीडिया एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म है, जहां व्यक्ति स्वयं को अथवा अपने किसी उत्पाद को ज्यादा लोकप्रिय बना सकता है। आज फिल्मों के ट्रेलर, टीवी प्रोग्राम का प्रसारण भी सोशल मीडिया के माध्यम से किया जा रहा है। वीडियो तथा ऑडि...

गुजरात में राजनैतिक भूचाल, क्या कोंग्रेस की होगी सत्ता वापसी ? भाजपा को मिलेगा सन्यास ?

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गुजरात की राजनीति में भूचाल...! क्या कोंग्रेस की होगी सत्ता वापसी ??? भाजपा का होगा बुरा हाल ??? आने वाले साल में गुजरात विधानसभा का चुनाव जैसे जैसे नजदीक आ रहा है वैसे वैसे राजनैतिक गतिविधियां तेज होने लगी है. कुछ दिन पहले गुजरात के प्रदेश प्रमुख के तौर पर जगदीश ठाकोर को कोंग्रेस द्वारा नियुक्त किया गया. जगदीश ठाकोर जमीनी कार्यकर्ता से जुड़े हुए नेता है. संगठन की ताकत को अच्छी तरह समझते है. जैसे ही उनके नाम की घोषणा हुई भाजपा में हड़कंप मचा हुआ है. क्योंकि ठाकोर समाज के प्रदेश प्रमुख बनते ही जगदीश ठाकोर ने अल्पेश ठाकोर के कोंग्रेस में लाल जाजम बिछी हुई होने के संकेत दे दिए है. वैसे ही पिछले सप्ताह गुजरात कोंग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रमुख भरतसिंह सोलंकी ने पाटीदार नेता और खोडलधाम के अग्रणी नरेश पटेल से मुलाकात की थी. उस मुलाकात को राजनैतिक ही देखा गया था. ऊपर से आज नरेश पटेल ने स्टेटमेंट दिया है की अगर पाटीदार समाज कहेगा तो में राजनीति में जरूर आऊंगा. उसके बाद नरेश पटेल की कोंग्रेस में शामिल होने की अटकलें तेज हो चुकी है. क्योंकि अगर उनको राजनीति में आना ही है तो वो भाजपा में तो जायेंगे ...

"सब्जी मंडी और राजनीति"

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 "सब्जी मंडी और राजनीति" सब्जी मंडी और राजनीति पढ़ने में कुछ अजीब सा लग रहा होगा पर आजकी राजनीति में यही चल रहा है. इसको दो अलग अलग तरीकों से समझना जरूरी है. (1) सब्जी मंडी सब्जी मंडी में जब तरोताजा सब्जी आती है तब (बीचवाले) दलाल सब्जी के दाम तय करते है. फिर उसी दाम से ज्यादा जो व्यापारी पैसा दे पाएगा वही व्यापारी उस सब्जी को खरीद पाएगा. सब्जी को खरीदने के बाद छोटे छोटे व्यापारी अपनी कमाई उस दाम पर बढ़ाकर सब्जी बेचते है, सुबह सुबह आप अगर सब्जी खरीदने जाओगे तो आप जैसे ही उनसे दाम कम करने को कहेंगे वैसे ही वो मना कर देगा की अगर आपको इसी दाम से सब्जी खरीदनी हो तो खरीदे नही तो आगे चले जाइए. क्योंकि उनको पता है तरोताजा सब्जी ऊपर से शादियों का मौसम है तो शाम तक तो उचित दाम के सब्जी पूरी की पूरी बिक ही जाने वाली है, फिर वो अपनी कमाई क्यो छोड़ दे. खेल अब शुरू होता है. जैसे जैसे दिन ढलने लगता है वैसे वैसे व्यापारी हर घंटे सब्जी को तरोताजा रखने की कोशिश करता रहता है. जैसे ही शाम हो जाती है, आप उसी व्यापारी के पास जाओ और उसी सब्जी के दाम को आप घटाने के लिए कहो जिस सब्जी के दाम आपने सुबह...

नवरात्रि के महत्व को समझे और नई पीढ़ी को भी समझाए.

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  *1.) प्रथम शैलपुत्री यानि हरड़ -*  नवदुर्गा का प्रथम रूप शैलपुत्री माना गया है। कई प्रकार की समस्याओं में काम आने वाली औषधि हरड़, हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप हैं। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है, जो सात प्रकार की होती है।  *हरीतिका (हरी)-* भय को हरने वाली है। *पथया -* जो हित करने वाली है।   *कायस्थ -* जो शरीर को बनाए रखने वाली है। *अमृता -* अमृत के समान। *हेमवती -* हिमालय पर होने वाली। *चेतकी -* चित्त को प्रसन्न करने वाली है। *श्रेयसी (यशदाता) शिवा -* कल्याण करने वाली। *2.) द्वितीय ब्रह्मचारिणी यानि ब्राह्मी -*  ब्राह्मी, नवदुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है। यह आयु और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाली, रूधिर विकारों का नाश करने वाली और स्वर को मधुर करने वाली है। इसलिए ब्राह्मी को सरस्वती भी कहा जाता है। यह मन व मस्तिष्क में शक्ति प्रदान करती है और गैस व मूत्र संबंधी रोगों की प्रमुख दवा है। यह मूत्र द्वारा रक्त विकारों को बाहर निकालने में समर्थ औषधि है। अत: इन रोगों से पीडित व्यक्ति को ब्रह्मचारिणी की आराधना करनी चाहिए। *3.) तृतीय चंद्रघंटा यानि चन्...

हम गांधीजी की आलोचना कर सकते है, स्थानीय गैंगस्टर की नही...!

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 हम गांधी जी की घोर आलोचना कर सकते हैं  स्थानीय गैंगस्टर नहीं!  मैंने ऐसे कई पोस्ट देखे हैं जिनमें गांधीजी की देशद्रोही/ब्रिटिश एजेंट/दलितों/पाखंडी आदि के दुश्मन के रूप में आलोचना की गई है!  सभी को किसी भी विचार के खिलाफ अपनी राय व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए  लेकिन विवेक के साथ  स्वस्थ समाज के लिए यह भी जरूरी  गांधीजी को एक और विचार के समर्थन के लिए एक शब्द देना फैशन बन गया है  कई लोगों ने गांधी जी की आलोचना कर अपना करियर भी बनाया है  प्रारंभ में, ओशो ने गांधीजी की कठोर आलोचना करके लोकप्रियता हासिल की  लेकिन ओशो अगर आज जीवित होते तो नकली राष्ट्रवादियों की आलोचना नहीं कर पाते थे  उन्होंने गांधीजी की कितनी भावुकता से आलोचना की!  ओशो अगर स्वघोषित  देशभक्तों की आलोचना करते हैं तो  ट्रोल्स गैंग दे रही है मा-बेन एक डर्टी स्पैंकिंग  उसी तरह स्वामी अग्निवेश पर हमला करके  उन्हें चुप कराओ!  आज का युवा कभी भी पुस्तकालय नहीं जाता और इतिहास का एक पन्ना पढ़ने की कोशिश नहीं करता  *आईटी सेल* उनके मोबाइ...

गुजरात में भाजपा के चाणक्य का दाव उल्टा पड़ गया...!?

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गुजरात में भाजपा की सरकार ने मुख्यमंत्री विजय रुपाणी का इस्तीफा लेकर सारे के सारे मंत्रियो को घर का रास्ता दिखा दिया. अब नए मुख्यमंत्री के रूप में भूपेंद्र पटेल को बिठाकर नए मंत्रियों की टीम बनाकर जनता के सामने पेश की गई है. पुराने जो मंत्री थे उसमे से एक भी मंत्री को नए मंत्रिमंडल में शामिल नही किया गया. इस बात पर कुछ गोदी मीडिया के द्वारा ये साबित करने का प्रयास किया जा रहा है की जो व्यक्ति भाजपा में रहते मोदीजी के हिसाब से काम नही कर पाता उनको घर पर बिठा दिया जाता है. चाहे वो मंत्री हो या मुख्यमंत्री. गुजरात भाजपा की प्रयोग शाला है, यहां जो सक्सेस गया वो मॉडल पूरे देश में लागू किया जा सकता है ऐसा भाजपाई और मोदी जी का कहना है.  पर इस बार बार कुछ और ही है..! इसको समझने के लिए पहले से शुरू करना पड़ेगा..! जिस दिन विजय रुपाणी का इस्तीफा आया उसके अगले दिन अमित शाह गुजरात आए थे और सब कुछ ( उसके हिसाब से) सेट कर गए थे. जैन के त्योहार संवत्सरी के दूसरे दिन विजय रुपाणी को इस्तीफा देना है. कोई भी सूचना के बिना, किसी को भी भनक ना लगी, यहां तक की पत्रकारों के सोर्स भी काम नही आए, और अचानक वि...