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ये राजनीति किस और जा रही है ???

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 राजनीतिक कार्यकर्ताओं और कुछ जाहिलों को छोड़ दिया जाए तो इस देश का एक बड़ा वर्ग है जो पनौती, पप्पू, नीच, पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड, जर्सी गाय जैसे संबोधन से विचलित होता है।  इस तरह का पोस्टर जब सत्तारूढ़ पार्टी के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से पोस्ट होता है तो लगता है कि राजनीति में इतनी फूहड़ता आ गई है कि अब भाषागत शुचिता की उम्मीद ही मुर्खता है। क्या ऐसे ही न्यू इंडिया का सपना देखा था हमने ??? Kalpesh Raval 

भाजपा में लगी आग कब बुझेगी ?? हवा कौन दे रहा है ???

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अपनी पार्टी भारतीय जनता पार्टी को सिस्तबद्ध पार्टी कहते कहते थकते नहीं भाजपा नेता. पर अब भाजपा का अंदरूनी कलह धीरे धीरे बाहर आने लगा है. ये सिर्फ गुजरात में नही हो रहा. असम, मध्यप्रदेश, राजस्थान महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में दिखाई देने लगा है. पहले गुजरात में तीन महिला नेताओ के बीच हुई बबाल की बात करते है. जामनगर 78 के विधायक और क्रिकेटर रविंद्र जडेजा की पत्नी रीवाबा ने जामनगर के सांसद और महापौर को जनता के बीच में छोटी सी बात में बीच चौराहे पर बबाल हो गया और भाजपा नेताओं में जामनगर से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया. बबाल धीरे धीरे बढ़ा विधायक ने महापौर को कहा की आप अपनी औकात में रहिए. मुझे पता है चुनाव में किसने क्या किया था. सुनकर सांसद पूनम बेन ने शांति बनाए रखने की अपील की तो विधायक ने उनको भी सुना दिया और कहा ये सब आपने ही जलाया है अब बुझाने की कोशिश कर रही है. ये सब तब हुआ जब शाहिद मेमोरियल पर श्रद्धांजलि देने भाजपाई नेता और कार्यकर्ता इकट्ठे हुए थे. अपने आप को शिस्तबद्ध पार्टी बताने वाली भाजपा का सिस्त एक ही झटके में जनता के सामने आ गया. पूरे दिन बबाल के बाद बात सीधी गांधीनगर और द...

मोदी सरकार के 9 साल 91 गालियां और जनता के 91 सवाल..

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 मोदी सरकार के 9 साल 91 गालियां और जनता के 91 सवाल.. केंद्र में बैठी प्रधानमंत्री मोदीजी की सरकार को 9 साल पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा एक महीने के लिए पूरे देश में एक से बढ़कर एक कार्यक्रम का आयोजन करके जनता के बीच में मोदीजी की छवि चमकाने का काम शुरू किया गया है. मोदीजी खुद के मन की बात तो रेडियो के जरिए जनता तक पहुंचा देते है पर जनता के मन की बात सुनने वाला कोई नही है. इसलिए एक हम जनता की बात को मोदीजी तक पहुंचाने के लिए 9 साल 91 गालियां और जनता के 91 सवाल के जरिए मोदीजी से सवाल कर रहे है. शायद ही कोई सवाल का जवाब मोदीजी देंगे...! 01. अच्छे दिन कब आयेंगे ??? 02. किसके एकाउंट में 15 लाख जमा किए ??? 03. महंगाई कब कम होगी ??? 04. पेट्रोल डीजल के दाम कब कम होंगे ? 05. 2 करोड़ बेरोजगारों को रोजगार दिया क्या ??? 06. चीन को लाल आंख कब दिखाएंगे ??? 07. नोट बंदी से जनता को और सरकार को क्या मिला ??? 08. 370 हटने से कश्मीर में कितनो ने प्लॉट खरीदा और कितनी कंपनी ने प्लांट खड़े किए ??? 09. किसानों की आय दुगनी हुई क्या ??? 10. बेटियां सुरक्षित क्यो नही ??? 11. शिक्षा संस्थानों की ह...

9 साल की मोदी सरकार की नाकामिया...

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 9 साल की मोदी सरकार की नाकामिया... 2014 में जब केंद्र में मोदी सरकार का गठन हुआ उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने जनता से बड़े बड़े वादो की बौछार की थी, जनता को बड़े बड़े सपने दिखाए थे पर वो सपने मुंगेरीलाल के हसीन सपने समान साबित हुए... क्या क्या वादे किए गए थे ???? मोदीजी ने वादे किए थे की केंद्र में अगर भाजपा की सरकार आई तो विदेश से काला धन वापस लाएंगे, हर भ्रष्टाचारियों को जेल में डालेंगे, किसानों की आय दुगनी हो जायेगी, 2022 तक सबको अपना खुद का घर मिलेगा, 100 स्मार्ट सिटी बनाएंगे, महंगाई कम करेंगे आदि... पर आज के समय में वास्तविकता क्या है ????? Demonetisation के बाद क्या हुआ ??? और नोट बंदी के समय पर क्या कहा था ???? मोदी सरकार ने नोट बंदी ( नोट बदली) करने का अचानक फैसला कर दिया और रात 8 बजे सूचना दे दी की 1000 और 500 ₹ के नोट रात 12 बजे के बाद बंद हो जाएंगे...! उदेश क्या था ??? मार्केट में जो काला धन है उनको बैंको में जमा करवाना, डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देना, डुप्लीकेट करंसी को बंद करवाना... हुआ क्या ???? ना काला धन कही से वापस आया, ना डिजिटल क्रांति का सपना पूरा...

मोदीजी की पकड़ से छूट रही भाजपा...??!!!

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  मोदीजी की पकड़ से छूट रही भाजपा...??!!! भाजपा के सर्वेसर्वा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की पकड़ धीरे धीरे भाजपा से छूट रही है ऐसा साफ साफ दिखने लगा है... कर्नाटक में चल रहे चुनाव में भाजपा द्वारा एक ऐसे कैंडिडेट को विधानसभा का टिकिट दिया गया जिस कैंडिडेट पर एक से ज्यादा FIR दर्ज है और एक केस में एक साल की जेल सजा भुगत कर आया हुआ बाहुबली है. सूत्रों से पता चला है की विरोध के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी को उस कैंडिडेट के विधानसभा इलाके में अपनी रैली भी कैंसिल करनी पड़ी. वैसे तो भाजपा नेता हर बात पर कहते रहते है, हमारे यहां सब कुछ आलाकमान तय करता है. ( आलाकमान का मतलब मोदीजी और शाह जी) जी हा कर्नाटक के चुनाव में ताजा हालात ऐसे बन चुके है की खुद मोदीजी और शाह जी को भी समझ नही आ रहा की किस मुद्दो पर प्रचार करे, इसलिए कुछ न कुछ मनघड़ंत कहानियां सुनाते रहते है, जैसे बजरंग दल से बजरंगबली को जोड़ दिया था. अब जुमलो को सुनने भिड़ भी इकठ्ठा नही हो पा रही इसलिए मोदीजी के रोड़ शो करवाए जा रहे है, पर रोड शो में भी कर्नाटक भाजपा भिड़ नही जुटा पा रही.... जनता का मूड क्या है ??? कर्नाटक चुनाव ...

શાળા કે શોપિંગ મોલ ???!!!

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હોર્ડિંગ ઉપર “ખાનગી શાળા” ની  જાહેરાતોની વસંત ખીલશે. ”હનીમૂન” અને “હનુમાન” શબ્દ વચ્ચેનો ભેદ ન પારખી શકનારા સંચાલકો જાહેર ખબરો માટે  નાણાં કોથળી છૂટી મૂકી દેશે. પ્રોફેશનલ્સ કેમેરામેનો પાસે સ્ટુડિયોમાં બાળકોને ગોઠવી નાઈસ નાઈસ ઈમેજીસ બનાવી છટકા ગોઠવશે.  જાહેરાતમાં બધું જ લખશે,  સિવાય કે “ફીની વિગત” મગજને લીલુંછમ કરી, હ્રદયને ઉજ્જડ બનાવી દેતી કેટલીક સ્કૂલો છે !  વેદના તો જુઓ, બાળકની છાતીએ આઈકાર્ડ લટકે છે પણ તેની પોતાની “ ઓળખ” ગુમાવી ચૂક્યો છે. તે સ્ટુડન્ટ નથી રહ્યો, રનર બની ગયો છે, રનર. “લીટલ યુસેન બોલ્ટ” ઓફ એજ્યુકેશન સિસ્ટમ્સ.. ૧૫ કી.મી.નું અપડાઉન કરીને થાકી જતાં વડીલો, બાળકને ઘરથી ૨૦ કી.મી. દૂરની શાળામાં ભણવા મોકલે છે ! પેલા પાંડવોને મૂર્છીત કરી દેનાર યક્ષને કહો કે આને પૃથ્વી પરનું સૌથી મોટું આશ્ચર્ય કહેવાય ! વળી, પેલા જાહેરાતના બોર્ડ પર પણ  ક્યાં લખે છે કે દફતરનું વજન કેટલાં કિલો હશે ??? ગુજરાતનો એક સર્વે કહે છે કે,  શહેરમાં છેલ્લાં ૧૦ વર્ષમાં પ્રતિ બાળક ભણાવવાના ખર્ચમાં  ૧૫૦% નો વધારો થયો છે.  દેશના મધ્યમ વર્ગમાં “શિક્ષણખર્ચ” ના કારણે  ...

विरोध का तरीका कब तक सही ??

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 बदलते समय के साथ साथ विरोध का तरीका भी बदलता जा रहा है, पर विरोध की हद कहा तक ??? विरोध का कुछ नियम, कुछ हद तक हो तभी तक बर्दास्त किया जा सकता है. बीते समय में सत्ताधारियों के खिलाफ कई पार्टियों ने भी विरोध प्रदर्शन किए थे, पुतले भी जलाए गए थे, इंदिराजी की सरकार में अटल बिहारी वाजपेई बैल गाड़ी लेकर संसद भवन गए थे, कोई नेता पेट्रोल के दाम के विरोध में सायकल लेकर संसद गया, भाजपाई नेताओने यूपीए की सरकार में कपड़ा फाड़कर महंगाई के विरोध में प्रदर्शन किए, स्मृति ईरानी और अन्य नेताओने साथ मिलकर बीच रास्ते सिलिंडर रखकर विरोध किए, वैसे ही एनडीए के शासन में बदलते समय के साथ विरोध करने का तरीका भी बदलता जा रहा है. हाल में ही आपने देखा होगा की अदानी मामले पर JPC जांच की मांग के साथ कोंग्रेस ने संसद में हंगामा किया, भाजपाई सांसद राहुल गांधी माफी मांगे की मांग पर अड़ी रही और एक दिन भी सदन में जनता के मुद्दो पर काम नही हुआ. हुआ तो सिर्फ हंगामा. जनता के टेक्स के करोड़ों रूपिये हुए बर्बाद. आखरी दिन में कोंग्रेस के साथ सभी विपक्षी पार्टीओने साथ मिलकर संसद की गलियारों में ही प्रदर्शन शुरू कर दिया ...