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जनता "P" से परेशान है..! क्यो ???

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जनता "P" से परेशान..! क्यो ??? आम तौर पर देश की सरकार द्वारा बनाए गए कायदे कानून जनता के हित के लिए होते है, और उनका पालन करवाने वाले भी जानता के हित ( ऐसा मानकर चले) में काम करते है, पर जो कायदे और कानून होते है वो जनता की सहूलियत के लिए होते है, ना की जनता को परेशान करने के लिए... कहते है देश को दो गुजरातियों ने परेशान कर रखा है...! नाम लिखने की जरूरत नही है, क्योंकि आप के द्वारा बार बार उनका नाम लिया जाता है, इसलिए सीधे मुद्दे पर ही आ जाते है.. मोदीजी की सरकार में 2014 से अब तक जो भी नए नियम बनाए गए, या तो नई घोषणा की गई उनमें सरकार से ज्यादा परेशान जनता हुई है. नोटबंदी - जनता को लाइन में खड़ा रहना पड़ा, एकाउंट में पैसे होने के बावजूद खुद के पैसे काम नहीं आ रहे थे. GST - जीएसटी से कई छोटे छोटे व्यापारियों का व्यापार बंद हो गया, क्योंकि जीएसटी में अनगिनत क्षति के कारण बार बार उनमें सुधार किया गया, स्लैब भी ज्यादा रखा है, कुछ व्यापारियों को आज तक जीएसटी समझ नही आ रहा... कोरोना में लोक डाउन - कोरोना में अचानक लोक डाउन की वजह से कई परिवार के अपनो की जान चली गई, व्यापार बंद पड़...

સૌરાષ્ટ્રની સૌથી મોટી હૉસ્પિટલમાં ખૂન, તંત્રને ખુલ્લો પડકાર..!?

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  સૌરાષ્ટ્રની સૌથી મોટી હૉસ્પિટલમાં ખૂન, તંત્રને ખુલ્લો પડકાર..!? જામનગરની નહિ પણ સૌરાષ્ટ્રની સૌથી મોટી ગુરૂ ગોવિંદ સિંહ હોસ્પિટલમાં ગઈ કાલે રાત્રે એક શખ્સનું ટ્રોમા સેન્ટર ના ડ્રેસિંગ રૂમ પાસે મર્ડર થઈ ગયું છે. 24/7 ભરચક રહેતી આ જગ્યા પર ખૂન કરવામાં ખૂની કેવી રીતે સફળ રહ્યો કે રહ્યા તે પણ સવાલ ઉપજાવે તેવી સ્થિતિ છે. સિક્યોરિટી શું કરતી હતી ??? હોસ્પિટલ ના તમામ ઇમરજન્સી વોર્ડ તેમજ ઓપીડી માં સિક્યોરિટી ની વ્યવસ્થા હોસ્પિટલ તંત્ર દ્વારા ગોઠવવામાં આવેલ છે. સામાન્ય સંજોગોમાં કોઈ પણ સમયે સિક્યોરિટી દર્દીની સાથે એક કરતા વધુ લોકો હોય તો તેને વોર્ડ કે ઓપીડી ની બહાર કાઢી મૂકતાં હોય છે અને પોતે રખેવાળ છે તેવો રોબ જમાવતા હોય છે. પરંતુ આ ખૂન જેવી ઘટના બની ત્યારે સિક્યોરિટી સ્ટાફ શું કરતો હતો તે સવાલ સૌ કોઈના મનમાં ઉઠી રહ્યો છે. રાત્રિના સમયે સારવાર કરાવવા આવેલ શખ્શ ને ડ્રેસિંગ રૂમ પાસે વેઇટિંગ માં રાખેલ હતો મતલબ કે તેને કોઈ ઇજા હોવાના કારણે ડ્રેસિંગ ની જરૂર હતી એટલે પોતાનો વારો આવે તેની રાહ જોઈ રહ્યો હોવો જોઈએ. તેવા સંજોગોમાં મારનાર શખ્શો ત્યાં આવી ને છરીના ઘા મારી તેની હત્યા નિપજાવી ચાલ્યા ગય...

ब्राह्मण कौन है ???

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ब्राह्मण कौन है ??? प्रधानमंत्री जी या मुख्यमंत्री जी ध्यान से सुनिएगा... ब्राह्मण (General Category) कौन हैं ?? जिस व्यक्ति पर एट्रोसिटी_एक्ट 89 के तहत बिना इन्क्वारी के भी कार्यवाई की जा सकती है, ब्राह्मण जिसको जाति सूचक शब्द इस्तेमाल करके बेखौफ गाली दी जा सकती है, वो ब्राह्मण है। देश में आरक्षित 131 लोकसभा सीटो और 1225 विधानसभा सीटो पर चुनाव नहीं लड़ सकता है, लेकिन वोट दे सकता है, वो ब्राह्मण है। जिसके हित के लिए आज तक कोई आयोग नही बना, वो ब्राह्मण है। जिसके लिए कोई सरकारी योजना न बनी हो, वो ब्राह्मण है। जिसके साथ देश का संविधान भेदभाव करता है, वो ब्राह्मण है। मात्र जिसको सजा देने के लिए  NCSC और NCST का गठन किया गया वो ब्राह्मण और है। मात्र जिसे सजा देने के लिए हर जिले में विशेष SCST न्यायालय खोले गए हैं, वो अभागा ब्राह्मण है। जो स्कूल में अन्य वर्गों के मुकाबले चार गुनी फीस दे कर अपने बच्चों को पढाता है, वो बेसहारा ब्राह्मण है। नौकरी, प्रमोशन, allotment आदि में जिसके साथ कानूनन भेदभाव वैध है, वो बेचारा ब्राह्मण है। सरकारों व सविधान द्वारा सबसे ज्यादा प्रताड़ित किया जाने वाला ...

ट्रैफिक पुलिस आपकी गाड़ी रोके तो...

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 अगर आप रास्ते पर सफर कर रहे है और बीच रास्ते में किसी ट्रैफिक पुलिस ने आपको रोका तो वो आपके साथ कैसा व्यवहार करेगा वो तो आपको भी पता नही होगा.. पर अगर वो पुलिसमैन आपके साथ गलत व्यवहार करता है तो आपको क्या करना होगा ये जानना आपके लिए बहुत जरूरी है... पढ़िए आवश्यक जानकारी. वाहन चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मी न तो गाली दे सकता है और न ही मारपीट कर सकता है। अगर पुलिसकर्मी दुर्व्यवहार करे तो उस दौरान कैमरे का इस्तेमाल किया जा सकता है, इस पर कोई पाबंदी नही। साथ ही पुलिसकर्मी को फोन या कैमरा छीनने व तोड़ने का भी अधिकार नही है। अगर कोई पुलिसकर्मी ऐसा करता है तो उसकी शिकायत क्षेत्रीय पुलिस स्टेशन एवं पुलिस अधीक्षक/ पुलिस अयुक्त को लिखित में करें। साथ ही राष्ट्रीय मानवाधिकार अयोग में भी इसकी शिकायत दर्ज करायें। न्याय न मिलने पर न्यायालय में भी मामला दर्ज कराया जा सकता हैं।

बेरोजगारों के साथ आजकल यही हो रहा है: कल्पेश रावल

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बेरोजगार युवाओं के साथ यही हो रहा है...!: कल्पेश रावल सिंह ने तीन सहायक मंत्रालयिक रिक्तियों के लिए भर्ती जारी की।  जैसे ही जंगल के जानवरों को पता चला तो वे खुश हो गए और फॉर्म भरने के लिए दौड़ पड़े।  फॉर्म भरने की इतनी होड़ मची कि ऑनलाइन जंगल जॉब एप्लीकेशन सिस्टम नाम की वेबसाइट भी दो बार बंद करनी पड़ी।  क्लर्क ने सभी से प्रति फॉर्म सौ रुपये वसूले। छह महीने पूरे होने के बाद कॉल लेटर आये.  जानवर कॉल लेटर निकालने के लिए टिड्डे की दुकान पर गए।  जिसकी नियुक्ति भी राजा स्वयं करता था।  टिटीघोड़ा ने पाँच के बदले दस रुपये लिये और खाड़ी लूट ली।  जानवर यह जानने को उत्सुक थे कि उनकी संख्या कहाँ से आई, उन्होंने ख़ुशी से दस रुपये दिए।  गिर के जानवरों को परीक्षा के लिए रणथंभौर जाना पड़ता था.  रणथम्भौर के पशुओं का परीक्षण गिर में होना था।  जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से जानवरों को मध्य प्रदेश और जिम कॉर्बेट को मध्य प्रदेश में ले जाया गया।  परीक्षा ख़त्म होने के अगले दिन पत्रकार पोपटलाल ने ब्रेकिंग न्यूज़ दी कि इस बार का पेपर लीक हो गया है.  फॉर्म ...

ये राजनीति किस और जा रही है ???

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 राजनीतिक कार्यकर्ताओं और कुछ जाहिलों को छोड़ दिया जाए तो इस देश का एक बड़ा वर्ग है जो पनौती, पप्पू, नीच, पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड, जर्सी गाय जैसे संबोधन से विचलित होता है।  इस तरह का पोस्टर जब सत्तारूढ़ पार्टी के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से पोस्ट होता है तो लगता है कि राजनीति में इतनी फूहड़ता आ गई है कि अब भाषागत शुचिता की उम्मीद ही मुर्खता है। क्या ऐसे ही न्यू इंडिया का सपना देखा था हमने ??? Kalpesh Raval 

भाजपा में लगी आग कब बुझेगी ?? हवा कौन दे रहा है ???

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अपनी पार्टी भारतीय जनता पार्टी को सिस्तबद्ध पार्टी कहते कहते थकते नहीं भाजपा नेता. पर अब भाजपा का अंदरूनी कलह धीरे धीरे बाहर आने लगा है. ये सिर्फ गुजरात में नही हो रहा. असम, मध्यप्रदेश, राजस्थान महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में दिखाई देने लगा है. पहले गुजरात में तीन महिला नेताओ के बीच हुई बबाल की बात करते है. जामनगर 78 के विधायक और क्रिकेटर रविंद्र जडेजा की पत्नी रीवाबा ने जामनगर के सांसद और महापौर को जनता के बीच में छोटी सी बात में बीच चौराहे पर बबाल हो गया और भाजपा नेताओं में जामनगर से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया. बबाल धीरे धीरे बढ़ा विधायक ने महापौर को कहा की आप अपनी औकात में रहिए. मुझे पता है चुनाव में किसने क्या किया था. सुनकर सांसद पूनम बेन ने शांति बनाए रखने की अपील की तो विधायक ने उनको भी सुना दिया और कहा ये सब आपने ही जलाया है अब बुझाने की कोशिश कर रही है. ये सब तब हुआ जब शाहिद मेमोरियल पर श्रद्धांजलि देने भाजपाई नेता और कार्यकर्ता इकट्ठे हुए थे. अपने आप को शिस्तबद्ध पार्टी बताने वाली भाजपा का सिस्त एक ही झटके में जनता के सामने आ गया. पूरे दिन बबाल के बाद बात सीधी गांधीनगर और द...