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परीक्षा पेपर लीक होने पर जिम्मेदार कौन ???

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परीक्षा पेपर लीक होने पर पूरे परिवार का सपना टूट जाता है...! जिम्मेदार कौन ??? आज बात करता हु गुजरात में लीक हुए जूनियर क्लर्क के पेपर लीक की. जी हां 29 जनवरी इतवार को गुजरात में जूनियर क्लर्क की परीक्षा होनी थी, और उसमे 9 लाख 50 हजार से ज्यादा विद्यार्थी परीक्षा देने वाले थे, पर अगली रात यानी 28 जनवरी देर रात परीक्षा का पर्चा लीक हो गया. विभाग ने परीक्षा पर्चा लीक होने से परीक्षा रद्द करने का आदेश कर दिया. पर्चा लीक करने वालो पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही का भरोसा भी दे दिया और सुबह होते होते गुजरात के 5 और गुजरात से बाहर के 10 यानी टोटल 15 लोगो को अरेस्ट भी कर लिया. पर इससे क्या होगा ??? परीक्षा के प्रश्न पेपर के साथ एक व्यक्ति को पकड़ने के बाद परीक्षा रद्द की गई, गुजरात में टोटल 2995 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा का आयोजन किया गया था पर अचानक पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द करने के लिए पंचायत सर्विस सिलेक्शन बोर्ड द्वारा परीक्षा रद्द करने के लिए आदेश दिए गए...! गुजरात पंचायत सेवा सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की तरफ से परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया, वही पेपर लीक होने पर विपक्षी पार्टिया...

कोंग्रेस की डूबती नैया बचेगी भी या नही ???

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जी हां ऊपर का सवाल देखकर आपको भी सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि पिछले कई चुनावो में आप कोंग्रेस का परफॉर्मेंस देखकर जान ही गए होंगे. कोंग्रेस में चुनाव लडने के लिए नेता तो मिल जाते है, पर जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की और संगठन की कमी है जिससे आलाकमान भी वाकेफ है. सोचने वाली बात ये है की महानगर पालिका के बाद विधानसभा चुनाव में भी करारी हार का सामना करने के बावजूद कोंग्रेस आलाकमान कही भी अपने पदाधिकारियों को बदलने के मूड में नही दिख रही, और पदाधिकारी भी गोंद लगाकर कुर्सी से चिपकर बैठ गए है और मन ही मन में सोच रहे है की जब आलाकमान को हार से कुछ फर्क नही पड़ता तो हमे क्यो फर्क पड़े ??? हम क्यों इस्तीफा दे ??? तत्काल हुए गुजरात के महानगर पालिका के चुनावो में सभी जगह कोंग्रेस की हार हुई, विधानसभा में भी मुश्किल से 17 विधायक चुने गए, पर प्रदेश या नेशनल लेवल के एक भी नेता ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपना पद त्याग नही किया... EVM पर हार का ठीकरा कब तक फोड़ेंगे ??? हर बार की तरह इस बार गुजरात में हार के बाद हार की समीक्षा तो हो रही है, पर हर बार की तरह इस बार भी आप हार का ठीकरा ईव...

नए साल में आम जन की अपेक्षाएं क्या है ???

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  नए साल में आम जन की अपेक्षाएं क्या है ??? कोविड की आहट के बीच जाए साल के स्वागत के लिए कई शहर में कई जगह पर अनेकों कार्यक्रम आयोजित हुए. टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर भी भारी भीड़ देखने मिली, होटल, रेस्टोरेंट, क्लब सभी जगह नए साल का स्वागत जोरदार तरीके से किया गया. जो लोग पैसे खर्च कर सकते थे उन्होंने घर के बाहर पार्टी की, और जो आम लोग पैसे खर्च करने ने सक्षम नही थे, उन्होंने घर पर टीवी या ओटीटी पर अपनी पसंदीदा मूवी या प्रोग्राम देखकर 2023 का स्वागत किया. यूवाओ के लिए उत्सव मनाने के लिए आज ऑप्शन की कोई कमी नही है. बात मुद्दे की... आज मुझे बात करनी है की आज शुरू हुए 2023 के नए साल में आम जन, व्यापारी, महिला, युवा, विद्यार्थियों की क्या अपेक्षाएं है. महिलाओ की अपेक्षाएं.. आज से शुरू हुए नए साल में महिलाओ की अपेक्षाएं बस इतनी ही है, की रोजबरोज काम में आने वाली रसोई गैस, बिजली, राशन, सब्जी, कपड़े, आदि के दामों में जो कई साल से बढ़ोतरी हो रही है जिसकी वजह से आम परिवार की महिलाओ के घर का बजट बिगड़ा हुआ है. कभी थाली में दाल नही, तो कभी चावल नही, तो कभी बिना सब्जी के खाना परोसने की नौबत कई परिवा...

कॉरोना की आड़ में भारत जोड़ो यात्रा रोकने का प्रोपगेंडा

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  कॉरोना भी अब राजनीति बन रहा है. जी हा आपको पढ़कर यकीन नही होगा पर ये बात सच है. जब कोरोना की एंट्री हो रही थी तब सरकार द्वारा ट्रंप का समारोह जनता की भिड़ के बीच किया गया था. तब सरकार को कोरोना बढ़ने की चिंता नहीं थी. हालाकि ट्रंप के समारोह के बाद ही गुजरात और पूरे देश में कोरोना ने हाहाकार मचाया था और कई लोगो ने अपनी जान गवाई थी. ऑक्सीजन की किल्लत, अस्पताल में बैड की किल्लत, इंजेक्शन ना मिलना, शमशान में कतारे, घर वापसी के लिए बीच रास्ते फंसे लोग और आधी सफर में बीच रास्ते पर कई लोगो ने अपनी जान गवाई थी. ये बात तो पूरा देश जनता ही है. पता होने पर भी सरकार ने अपने निर्धारित कार्यक्रम चालू रखे थे और जनता की जान से खिलवाड़ करने का काम किया था. आज हालात फिर से गंभीर होने की बात करके  मंत्री मनसुख मांडविया ने कोंग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा पर सवाल उठाया है. मनसुख मांडविया ने राहुल गांधी को चिट्ठी लिखकर कहा है की भारत जोड़ो यात्रा में कोरोना प्रोटीकोल का पालन किया जाए, अन्यथा यात्रा को रोक दिया जाए. अब जनता के मन में कई सवाल उठने लगे है, माना की चीन में कोरोना फिर से हरकत में आ गया ...

વેવિશાળ એક સમસ્યા

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સર્વે સમાજ માટે લાલબતિરૂપ પ્રશ્ન. તમારે લગ્ન જ ન કરવા હોય અને તમારા લગ્ન થાય નહી આ બંને વસ્તુમાં આમ તો જમીન આસમાન નો ફર્ક છે. પુરુષ વાંઢો રહી જાય તો ઘણી વાર હાંસી પાત્ર બને છે જ્યારે સ્ત્રી વાંઢી રહી જાય એ દયા પાત્ર બને છે. સ્વઈચ્છા થી ન પરણેલી સ્ત્રી ઓ મોટા ભાગે સમાજ સેવા કે ધાર્મિક પ્રવૃતિ માં પોતાની જાત ને ઓગાળી ધ્યે છે. પરંતુ પોતા ની જીદ ને લીધે કુંવારી રહી ગયેલી સ્ત્રી ઓ ના વૈજ્ઞાનિક કારણો શું હોઈ શકે ? પ્રથમ કારણ :- શહેર નો મોહ !  ‘મારે તો રાજકોટ ની બહાર જવું જ નથી !’ ‘મને અમદાવાદ સિવાય દમ ઘુંટાય !’ ‘મુંબઈ ની બહાર ના પરણાય મરી જવાય !’ લગભગ દરેક મોટા શહેર માં જુવાન થનારી કન્યા ઓ આવી અવળી જીદે ચડી જાય છે. અલી ઘેલી ! પરણવાનું વ્યક્તિ સાથે છે કે શહેર ના બોર્ડ સાથે ! ચર્ચ ગેટ વાળી કન્યા ને કાંદીવલી માં નથી પરણવું તો નરોડા વાળી ને ચાંગોદર નથી જવું અને કાલાવડ રોડ વાળી ને ગાંધીગ્રામ માં નથી પરણવું. બોલો લ્યો ... શહેર નો છે એટલો મોહ પાત્ર માં રાખો તો એ જ્યાં હશે ત્યાં તમને સ્વર્ગ જેવું લાગશે. તમામ કન્યા ઓ મેટ્રો સીટી તરફ મીંઢોળ બાંધી ને દોડી રહી છે. એ જોતા તો એમ લાગે છે આવનારા વર્ષો મ...

પરિવર્તન ની આંધી...! ગુજરાતમાં "નમો" નહિ પણ "કમો" ભીડ જમાવે છે...!

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પરિવર્તન ની આંધી...! ગુજરાતમાં "નમો" નહિ પણ "કમો" ભીડ જમાવે છે...! ગુજરાતમાં ચૂંટણીની મૌસમ તો પુર બહારમાં ખીલી રહી છે, જેમ જેમ મતદાન ની તારીખ નજીક આવી રહી છે તેમ તેમ દરેક રાજનૈતિક પાર્ટીઓના નેતાઓ સભાઓ ગજવવા માંડ્યા છે. જનતા નો મૂડ કેમ નથી બની રહ્યો ??? ચૂંટણીમાં મતદાન ને હવે ગણતરીના દિવસો બાકી રહ્યા હોવા છતાં પણ જનતાનો મૂડ એક પણ રાજકીય પાર્ટી કે રાજકીય નેતા પારખી નથી રહ્યા, કેમ કે જનતા ના નોટબંધી માં પડેલ આર્થિક, સામાજિક મુશ્કેલીઓ, જીએસટી થી વેપારીઓ ને પડેલ અગવડતા અને વેપારમાં થયેલ નુકસાન ને કારણે વેપારીઓમાં પણ નારાજગી નો માહોલ જોવા મળી રહ્યો છે. કોરોના કાળમાં સરકાર દ્વારા તાત્કાલિક અસરથી લોક ડાઉન ની જાહેરાત કરી દેવામાં આવતાં તેમજ ઓક્સિજન મેળવવામાં પડેલ મુશ્કેલીઓ, હોસ્પિટલ ની ખામીઓ ઉપરાંત અવ્યવસ્થા ના કારણે સ્મશાન સુધી અનેક જગ્યાઓ પર લાગેલી લાઈનો લોકો હજુ ભૂલ્યા નથી. કોરીનામાં મૃત્યુ અંગેના આંકડાઓ પણ સરકાર દ્વારા છૂપાવવામાં આવ્યા હતા, ખેડૂત આંદોલનમાં 700 થી વધુ ખેડૂતોના મૃત્યુ થયા છતાં પણ ખેડૂતોને ન્યાય ના મળ્યો. મોંઘવારીનો મર અને હવે તો મોદી સરકારના નારા સાથે આવેલ ...

भारत जोड़ो यात्रा से भाजपा में हड़कंप..!

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  भारत जोड़ो यात्रा से भाजपा में हड़कंप..! जब से राहुल गांधी ने 3570 किलोमीटर की भारत जोड़ो यात्रा शुरू की है तब से भाजपा में हड़कंप मचा हुआ है. क्योंकि राहुल गांधी और भारत जोड़ो यात्रा को जबरदस्त सफलता मिल रही है, जगह जगह से हज्जारो लोग भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हो रहे है. राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को इतनी सफलता मिलती देखकर भाजपाई नेता हक्का बक्का हो गए है. इसलिए कभी राहुल गांधी के टीशर्ट पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते है, तो कभी इस यात्रा में जुड़े लोगो के रहने, खाने, पीने की व्यवस्था को लेकर सवाल करने लगते है. स्मृति ईरानी ने भी राहुल गांधी पर वार कर के कहा था कि राहुल गांधी स्वामी विवेकानंद को नमन करने नही गए, तब कोंग्रेस ने वीडियो जारी करके दिखा दिया की राहुल गांधी स्वामी विवेकानंद को नमन करने गए थे की नही. जिसे भाजपा नेता अच्छी तरह सोशल मीडिया में ट्रोल हुए. देखने वाली बात ये है की जब भी भाजपा भारत जोड़ो यात्रा पर बबाल मचाने की कोशिश करती है उनको मुंह की खानी पड़ी है. राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा लेकर जहा से गुजर रहे है वहा वहा पर छोटे बच्चो से लेकर बुजुर्गो से ऐसे मिल रह...